देहरादून:
प्रदेश जिला पंचायत सदस्य संगठन, उत्तराखंड की एक अहम वर्चुअल बैठक मंगलवार शाम आयोजित हुई, जिसमें जिला योजना समिति के गठन में देरी और पंचायत सदस्यों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल ने की, जबकि संचालन प्रदेश महामंत्री अजयवीर सिंह ने किया।
बैठक में सदस्यों ने आरोप लगाया कि कई जनपदों में बिना विधिवत गठन के ही जिला योजना समिति की बैठकें कराई जा रही हैं, जो नियमों के विपरीत है। चमोली और रुद्रप्रयाग में अब तक समिति की बैठक न होने पर भी नाराज़गी जताई गई। साथ ही, जिला पंचायत अध्यक्ष को समिति में केवल सदस्य के रूप में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई।
संगठन ने पंचायत सदस्यों की अनदेखी, योजनाओं में भागीदारी की कमी और निधियों के असमान वितरण जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। बैठक में यह भी मांग की गई कि कोटेशन आधारित कार्यों की सीमा बढ़ाई जाए और पंचायत स्तर पर सुरक्षा व कल्याण के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
बैठक में पांच प्रमुख मांगों पर सहमति बनी, जिनमें जिला योजना समिति के शीघ्र चुनाव, पंचायत सदस्यों का मानदेय ₹30,000 प्रतिमाह करने, विधायक निधि की तर्ज पर फंड व्यवस्था, पंचायत कल्याण कोष की स्थापना और कोटेशन कार्यों की सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाने की मांग शामिल है।
संगठन ने आगे की रणनीति तय करते हुए निर्णय लिया कि 11 मई को प्रदेशभर के सभी जनपदों में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके लिए सभी जिलों में एक समान प्रेस विज्ञप्ति और प्रेस वार्ता प्रारूप भी साझा किया जाएगा, ताकि आंदोलन को एकरूपता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
प्रदेश अध्यक्ष भास्कर सम्मल ने कहा कि संगठन पंचायत सदस्यों के अधिकार और सम्मान के लिए पूरी मजबूती से आवाज उठा रहा है और जनहित से जुड़ी इन मांगों को लेकर प्रदेशभर में एकजुटता के साथ संघर्ष जारी रहेगा।
