नई दिल्ली, मई 30: नई दिल्ली के प्रतिष्ठित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक भव्य समारोह में, प्रसिद्ध समाजसेवक और सनातन संस्कृति संरक्षक श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को “हिंदू केसरी सेवा, सुरक्षा एवं समरसता पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें स्वतंत्रता वीर सावरकर जयंती के अवसर पर ‘माय होम इंडिया’ संगठन द्वारा प्रदान किया गया.

सामाजिक समरसता और घर वापसी अभियान में योगदान
श्री जूदेव को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उनके द्वारा समाजसेवा, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय और निरंतर योगदान के लिए दिया गया है. वे विशेष रूप से अपने स्वर्गीय पिता, श्री कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी द्वारा शुरू किए गए ऐतिहासिक “घर वापसी अभियान” को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं. इस अभियान के तहत, उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण और उचित विधि-विधान से अब तक हजारों धर्मांतरित हिंदू भाई-बहनों की सनातन धर्म में वापसी सुनिश्चित की है.
प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति
इस गरिमामयी समारोह में देश की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं. विशिष्ट अतिथियों के रूप में माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी, प्रखर राष्ट्रवादी संत पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री श्री जयकुमार रावल, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ राजनेता श्री सत्यनारायण जटिया, और ‘माय होम इंडिया’ के संस्थापक श्री सुनील देवधर उपस्थित रहे. उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन के महत्व को रेखांकित किया. यह उल्लेखनीय है कि यह सम्मान इससे पहले सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान संपादक श्री सुरेश चव्हाणके को भी प्रदान किया जा चुका है.
“पिता के आदर्शों और आशीर्वाद से अभियान जारी रहेगा”: जूदेव
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने अपने संबोधन में कहा कि यह सम्मान उनके लिए सौभाग्य और प्रेरणा दोनों का विषय है. उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा, “पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन सनातन संस्कृति, राष्ट्रसेवा एवं सामाजिक समरसता के लिए समर्पित किया. उन्हीं के आदर्शों एवं आशीर्वाद से वे निरंतर इस अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं.” उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि यह सम्मान उन्हें समाजहित और राष्ट्रहित में कार्य करने के लिए नई ऊर्जा प्रदान करता है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि सनातन संस्कृति की रक्षा, सेवा, सुरक्षा और समरसता का यह अभियान भविष्य में भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जारी रहेगा.
